अमरकंटक के रहस्यमयी पत्थर: जहां पत्थर बन जाते हैं महल की सीढ़ी
यहां मंदिर में बनती है सपनों के घर की मंजिल

शहडोल। मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक में आस्था सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं, यहां सपनों की नींव भी पत्थरों से रखी जाती है। नर्मदा मंदिर परिसर में श्रद्धालु पत्थरों की मंजिल बनाकर अपने मनचाहे घर और आलीशान भवन की कामना करते हैं, जिसे मां नर्मदा का आशीर्वाद माना जाता है। शहडोल संभाग के अनूपपुर जिले में स्थित पवित्र नगरी अमरकंटक, मां नर्मदा के उद्गम स्थल के रूप में तो प्रसिद्ध है ही, लेकिन यहां की कुछ अनोखी मान्यताएं इसे रहस्य और आस्था का अद्भुत केंद्र भी बनाती हैं। ऐसी ही एक रोचक और गहरी आस्था से जुड़ी मान्यता नर्मदा मंदिर परिसर में रखे पत्थरों को लेकर है, जहां श्रद्धालु अपने सपनों के घर की मंजिल यहीं गढ़ते हैं।
नर्मदा मंदिर परिसर में रखे छोटे-बड़े पत्थरों को श्रद्धालु एक के ऊपर एक रखकर मंजिलनुमा ढेर बनाते हैं।
क्या है मान्यता ?
श्रद्धालु नारायण केशवानी के मान्यता अनुसार, कोई भक्त जितनी मंजिल का पत्थरों का ढेर तैयार करता है, उसे भविष्य में उतनी ही मंजिल का घर या भवन प्राप्त होता है। यही कारण है कि मंदिर परिसर में हर दिन लोग बड़े विश्वास के साथ पत्थरों को सहेजते, संतुलन बनाते और अपनी मनोकामनाओं को पत्थरों की मंजिलों में ढालते नजर आते हैं। यह दृश्य केवल आस्था का नहीं, बल्कि धैर्य और विश्वास की परीक्षा भी है। कई श्रद्धालु सावधानीपूर्वक पत्थरों को रखते हैं ताकि ढेर गिरे नहीं, क्योंकि माना जाता है कि पत्थरों का गिरना मनोकामना में बाधा का संकेत होता है। वहीं जो भक्त सफलतापूर्वक ऊंची मंजिल बना लेते हैं, वे इसे मां नर्मदा का आशीर्वाद मानते हैं।
