दूषित पानी कांड में लुट गए मरीज: मंत्री के दावों के बीच इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट
कांग्रेस ने हाथ में ‘घंटा’ लिए कैलाश विजयवर्गीय के पुतले को पिलाया तालाब का पानी, सपा के गंभीर आरोप

इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा लगाए इंदौर में दूषित पानी कांड ने सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के तमाम दावे ज़मीनी हकीकत में फेल साबित हो रहे हैं। हालात यह हैं कि दूषित पानी पीने से बीमार हुए मरीजों से प्राइवेट अस्पताल मनमानी वसूली कर रहे हैं और दूसरी ओर इंश्योरेंस कंपनियों ने भी क्लेम देना लगभग बंद कर दिया है। जैसे ही दूषित पानी से बीमार पड़ने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी, वैसे ही इंश्योरेंस कंपनियों ने इलाज का खर्च उठाने से हाथ खड़े कर दिए।
मजबूरी में प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हो रहे मरीज
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि बीमारी आपदा जैसी स्थिति होने के बावजूद क्लेम रिजेक्ट किए जा रहे हैं, जिससे पहले से परेशान लोगों पर दोहरी मार पड़ रही है। सरकारी व्यवस्था भी पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। स्वास्थ्य विभाग ने जिन अस्पतालों को चिन्हित किया है, वहां बेड उपलब्ध नहीं हैं। मजबूरी में मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जहां इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है। ज्योति अस्पताल इसका ताजा उदाहरण है, जहां नितेश शर्मा नाम का मरीज पिछले तीन दिनों से भर्ती है।
भर्ती के समय ही वसूल लिए 5 हजार रुपए
परिजनों का आरोप है कि भर्ती के समय ही अस्पताल ने 5 हजार रुपए जमा करवा लिए। नितेश शर्मा निवासी भागीरथ पूरा को उल्टी-दस्त की गंभीर शिकायत के चलते भर्ती किया गया था, लेकिन सरकारी निर्देशों के बावजूद इलाज मुफ्त नहीं किया गया। सबसे गंभीर सवाल यह है कि कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा दिए गए स्पष्ट निर्देशों का स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी पालन नहीं कर रहे हैं। आदेश कागजों तक सीमित रह गए हैं और प्राइवेट अस्पताल खुलेआम मरीजों से पैसे वसूल रहे हैं। इलाज का खर्च उठाने में कई परिवारों की आर्थिक हालत बिगड़ चुकी है। रोजमर्रा की मजदूरी करने वाले लोग कर्ज लेने को मजबूर हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।




