दुनिया

फर्जी बीमा पॉलिसी कांड के आरोपी 21 साल बाद दोषमुक्त, हाईकोर्ट ने पलटा CBI कोर्ट का फैसला

हाई कोर्ट ने कहा- संदेह सबूत का स्थान नहीं ले सकता

बिलासपुर. बिलासपुर हाईकोर्ट ने दो दशक पुराने एलआईसी फर्जीवाड़ा मामले में दो आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है. जस्टिस रजनी दुबे की सिंगल बेंच ने सबूतों के अभाव और अभियोजन की कमियों को आधार मानते हुए सजा को रद्द कर उन्हें सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है. वर्ष 1994-95 में सीबीआई ने आरोप लगाया था कि बिलासपुर निवासी अविनाश पंडित और अरुण वसंत बापट ने आपस में सांठगांठ कर अंबिकापुर से बिलासपुर शाखा में फर्जी तरीके से बीमा पॉलिसी ट्रांसफर करवाई और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक लाख रुपए का लोन लिया. मामले में रायपुर स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने 18 अक्टूबर 2005 को दिए गए फैसले में दोनों को जालसाजी, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत एक-एक वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी. इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की गई थी. हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि आरोपियों ने वास्तव में दस्तावेजों में कोई हेरफेर की थी या वे किसी बड़ी साजिश का हिस्सा थे. एलआईसी में लोन की प्रक्रिया के दौरान कई स्तरों पर जांच होती है, लेकिन सीबीआई यह नहीं बता पाई कि आरोपियों ने इन सुरक्षा चक्रों को कैसे तोड़ा. साथ ही, हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट और गवाहों के बयानों में भी कई विसंगतियां पाई गईं. कहा कि केवल संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि ठोस सबूत न हों.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button