
16 साल पहले टाटा 407 (ट्रक) के चालक ने एक कार को टक्कर मार दी थी. हादसे के दौरान कार में आग लगने से चालक जिंदा जल गया. कोर्ट ने अब ट्रक चालक को हादसे के लिए जिम्मेदार मानते हुए दोषी करार दिया है.
अदालत ने ट्रक चालक को इस अपराध के लिए छह महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई है.
साकेत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अरुल वर्मा की अदालत ने ट्रक चालक वीर बहादुर सिह को गलत दिशा में तेज रफ्तार में वाहन चलाने और लापरवाही से एक निर्दोष व्यक्ति की मौत का कारण बनने का दोषी पाया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ट्रक की टक्कर की वजह से कार में आग लग गई. कार चालक आग की लपटों में घिर गया और वह बाहर नहीं निकल पाया. जिसकी वजह से वह कार के भीतर ही सौ फीसदी जल गया. अस्पताल ले जाने तक उसकी मौत हो चुकी थी. हालांकि अदालत ने दोषी ट्रक चालक को सुनाई गई छह महीने की साधारण कैद की सजा को न्यायसंगत माना है.
मृतक के परिवार को मिलेगा मुआवजा इस मामले में अदालत ने इस तथ्य पर गौर किया कि मृतक कार का मालिक नहीं था, बल्कि वह पेशे से ड्राइवर था और वह कार मालिक के यहां नौकरी कर रहा था. कोर्ट ने माना कि मृतक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से ताल्लुक रखता था. ऐसे में दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) को निर्देश दिया है कि वह मृतक के परिवार को मुआवजा नीति के तहत उचित भुगतान करे.
यह घटना दक्षिणी दिल्ली में 23 नवंबर 2006 को हुई थी. एक पिकेट पर तैनात कांस्टेबल ने गलत दिशा में आ रहे टाटा 407 के ड्राइवर वीर बहादुर सिंह को रुकने का इशारा किया था. पुलिसकर्मी को देख ड्राइवर ने ट्रक की गति और तेज कर ली. इसी जल्दबाजी में ट्रक चालक की टक्कर सामने से आ रही कार से हो गई. कार में आग लगने से चालक बाहर नहीं निकल पाया. जब तक मौके पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंची तब तक कार चालक सौ फीसदी जल चुका था. आरोपी ट्रक चालक को मौके पर ही पकड़ लिया गया था.


