
लोकसभा में बजट चर्चा पर जवाब देते हुए शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट को मध्यम वर्ग, रोजगार सृजन, लघु उद्यमों, कृषि क्षेत्र, ग्रामीण आबादी, स्वास्थ्य एवं हरित विकास पर केंद्रित बताया. कहा कि महामारी एवं रूस-यूक्रेन संघर्ष से उबरते हुए भारत सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और आगे भी रहेगा.
वित्त मंत्री ने खाद्य एवं उर्वरक सब्सिडी में कटौती करने के विपक्षी दलों के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि सरकार ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए इसमें पूंजी डालने का रास्ता चुना, क्योंकि इसका बहुआयामी असर है. साथ ही नई कर प्रणाली को आकर्षक बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे लोगों के हाथ में खर्च करने के लिए अधिक धन रहेगा. बजट में विकास अनिवार्यताओं को राजकोषीय आयामों के दायरे में संतुलित करने का पूरा प्रयास किया गया है. वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक उर्वरक सब्सिडी 65 हजार करोड़ से 80 हजार करोड़ के दायरे में रही. वर्ष 2023-24 के बजट प्रस्ताव में इसे बढ़ाकर 2.25 लाख करोड़ करने का प्रस्ताव है. उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि उर्वरकों की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ी हैं, पर हमने किसानों पर उसका भार नहीं पड़ने दिया.
बैंक बेहतर स्थिति में वित्तमंत्री ने कहा कि देश के बैंक बेहतर स्थिति में है. पीएम लगभग हर माह बैंकिंग हालात की समीक्षा कर रहे हैं. खराब कर्ज पर कहा, अगर कोई कर्ज बट्टेखाते में डाला जाता है व बैंक की तरफ से उसे राइट ऑफ यानि खातों से अलग कर दिया जाता है तो इसका मतलब नहीं है कि वो गायब हो गया.


