तिहाड़ जेल मेंआत्मसमर्पण करने के लिए जेल के बाहर कैदियों की लंबी कतार लगी

नई दिल्ली . कोरोना काल में आपातकालीन जमानत और पैरोल पर जेल से बाहर आए कैदियों को अब कार्रवाई का डर सताने लगा है. यही वजह है कि आत्मसमर्पण के लिए जेल के बाहर कैदियों की कतार लग रही है. सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद ऐसा देखने को मिल रहा है.
कोरोना महामारी के दौरान काफी संख्या में राजधानी की विभिन्न जेलों से कैदियों को आपातकालीन जमानत और पैरोल पर रिहा किया गया था. उस समय कोरोना के चलते जेल से भीड़ को कम करने के लिए ऐसा किया गया था. ऐसे कैदियों की संख्या चार हजार से अधिक है. ये कैदी पिछले दो से तीन साल से जेल से बाहर चल रहे थे. ज्यादातर ने आत्मसमर्पण नहीं किया. इसको लेकर 24 मार्च को सर्वोच्च न्यायालय ने कैदियों को 15 दिन के भीतर जेल में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था. शुरुआत में बहुत ही कम कैदियों ने आत्मसमर्पण किया, लेकिन जैसे-जैसे समय नजदीक आ रहा है. राजधानी की जेलों के बाहर कैदियों की लंबी कतार लगी रही. हालांकि, अभी भी सभी कैदी वापस नहीं लौटे हैं. जेल में कैदियों को कोरोना से बचाने के लिए 2020-21 में अलग-अलग समय में 3,630 विचाराधीन और 751 दोषी कैदियों को पैरोल और अंतरिम जमानत दी गई थी.
कई पर दोष सिद्ध हो चुके
जेल प्रशासन के मुताबिक, सात अप्रैल शाम पांच बजे तक 1768 कैदियों ने सरेंडर किया. इनमें सें 1243 विचाराधीन कैदी हैं, जबकि दोषी श्रेणी के 523 कैदी हैं. तिहाड़ के 448 कैदी हैं, इनमें 195 दोषी हैं. इसी तरह रोहिणी जेल के 52 कैदी विचाराधीन हैं और नौ दोषी है. मंडोली जेल के 196 कैदी विचाराधीन हैं, इनमें 63 कैदी दोषी हैं.



