राष्ट्र

सत्यपाल मलिक के पूर्व सहयोगी, सीए पर सीबीआई की छापेमारी

नई दिल्ली . सीबीआई ने कथित बीमा घोटाले में जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के पूर्व सहयोगी के ठिकानों पर बुधवार को छापेमारी की. दिल्ली में दस और राजस्थान में दो जिलों में कार्रवाई की गई.

अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने मलिक के पूर्व सहयोगी सौनक बाली, सीए संजय नारंग, वीरेंद्र सिंह राणा और कंवर सिंह राणा, प्रियंका चौधरी एवं अनीता से जुड़े दिल्ली और राजस्थान के ठिकानों पर तलाशी ली. जांच एजेंसी ने गत 28 अप्रैल को मलिक से उनके आवास पर पूछताछ की थी. बिहार, जम्मू-कश्मीर, गोवा और मेघालय के राज्यपाल रहे मलिक का पिछले साल अक्तूबर में सीबीआई ने पहली बार बयान दर्ज किया था. अधिकारी ने कहा कि मामले में वित्तीय दस्तावेजों के आकलन, डिजिटल साक्ष्य एवं आरोपियों और अन्य लोगों के बयानों को देखते हुए तलाशी अभियान जरूरी हो गया था.

जांच एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर सरकार के कर्मचारियों के लिए चिकित्सा बीमा योजना से संबंधित अपनी प्राथमिकी में रिलायंस जनरल इंश्योरेंस और ट्रिनिटी री-इंश्योरेंस ब्रोकर्स लिमिटेड को आरोपी बनाया है. कथित तौर पर योजना को 31 अगस्त, 2018 को राज्य प्रशासनिक परिषद की बैठक में मलिक द्वारा मंजूरी दी गई थी. बाद में यह योजना रद्द कर दी गई. एक प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि जम्मू-कश्मीर सरकार के वित्त विभाग के अज्ञात अधिकारियों ने अपने पदों का दुरुपयोग कर कदाचार किया. इस काम को ट्रिनिटी री-इंश्योरेंस ब्रोकर्स लिमिटेड, रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और अज्ञात लोक सेवकों एवं अन्य व्यक्तियों के साथ साजिश और मिलीभगत से अंजाम दिया.

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने 2017 से 2018 की अवधि के दौरान खुद को आर्थिक लाभ और राज्य के खजाने को गलत तरीके से नुकसान पहुंचाया. इस तरह जम्मू-कश्मीर की सरकार को धोखा दिया.

कीरू जलविद्युत परियोजना से संबंधित कार्य के ठेके देने में कथित गड़बड़ी के बारे में दूसरी प्राथमिकी में सीबीआई ने आरोप लगाया कि ई-निविदा से संबंधित दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया.

सीबीआई ने सरकारी कर्मियों के लिए एक सामूहिक चिकित्सा बीमा योजना का ठेका देने और जम्मू-कश्मीर में कीरू जलविद्युत परियोजना से जुड़े 2,200 करोड़ के निर्माण में भ्रष्टाचार के मलिक के आरोपों के संबंध में दो प्राथमिकी दर्ज की थी. मलिक ने दावा किया था कि जब वह जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे, उस दौरान उन्हें दो फाइलों को मंजूरी देने के लिए 300 करोड़ की रिश्वत की पेशकश की गई थी. वह 23 अगस्त, 2018 से 30 अक्तूबर, 2019 तक राज्यपाल रहे थे.

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