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आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस की मदद से संदिग्धों को पहचानेगी डिवाइस

तकनीक के बदलते मौजूदा दौर में आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) का दखल तेजी से बढ़ रहा है. इसने विज्ञान को नया आयाम दिया है. इसी कड़ी में एक ऐसी तकनीक सामने आई है जो पुलिस और खुफिया एजेंसियों की राह आसान करेगी.

इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) और मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सर्विलांस सिस्टम विकसित किया है, जिससे सड़क, गली, चौराहा और सार्वजनिक स्थलों पर संदिग्ध हरकत करने वालों की शिनाख्त अब न सिर्फ आसानी से बल्कि तत्काल हो जाएगी. इतना ही नहीं संदिग्धों की जानकारी भी सीधे पुलिस या खुफिया एजेंसियों के कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी.

प्रोजेक्ट के मुख्य अनुसंधानकर्ता इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. आशीष खरे ने बताया कि आजकल अमूमन शहरों के हर चौराहों पर सर्विलांस के लिए 360 डिग्री वाले कैमरे लगाए जाते हैं, लेकिन इनकी निगरानी के लिए मैन पावर की जरूरत पड़ती है. जो नया सर्विलांस सिस्टम तैयार किया जा रहा है वह आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस के आधार पर काम करेगा और कैमरे में संदिग्ध दिखने या प्रतीत होने वाले व्यक्ति के व्यवहार का विश्लेषण कर सीधे कंट्रोल रूम को जानकारी भेजेगा. इस सिस्टम पर आधारित डिवाइस तैयार किया जा रहा है, जिसे कैमरे के साथ लगाया जाएगा. इसमें एलार्म की व्यवस्था भी होगी. ताकि मौके पर मौजूद सुरक्षा तंत्र को सक्रिय किया जा सके. यह डिवाइस लगने के बाद कंट्रोल रूम में या फिर चौक-चौराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की चौबीस घंटे मानीटरिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी.

बकौल प्रो. खरे यह सिस्टम संदिग्ध व्यवहार का विश्लेषण करने में सक्षम है. इस प्रोजेक्ट के शुरुआती कई चरणों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर प्रो. आशीष खरे और उनकी रिसर्च स्कॉलर डॉ.आरती कुशवाहा ने ऐसी तकनीक बना ली है जिससे मनुष्य की अलग-अलग गतिविधियों की पहचान आसानी से की जा सकती है. इन तकनीकों से संबंधित पांच महत्वपूर्ण रिसर्च पेपर अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित भी हो चुके है.

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