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दो हजार के नोटों खपाने के लिए सौदेबाजी शुरू

दो हजार के नोटों के चलन से बाहर हो जाने की घोषणा से शहर में कारोबार को बड़ा फायदा हो रहा है. कुछ सेक्टर ऐसे हैं जिनको सीजन से भी ज्यादा बेहतर रिस्पॉन्स मिल रहा है. जो दुकानदार एक दिन पहले तक दो हजार के नोटों में भुगतान लेने से इनकार कर रहे थे, अब पूरे खर्च करने की शर्त पर सहर्ष स्वीकार कर रहे हैं.

स्थिति ऐसी है कि कारोबारी संभावित ग्राहकों को कॉल करा रहे हैं. कि उनके यहां दो हजार के नोट आसानी से स्वीकार हो रहे हैं. एमजी रोड के कई पंपों पर पेट्रोल पंप पर टैंक फुल कराने की संख्या में अचानक इजाफा होने से लंबी लाइनें लग गईं. संजय प्लेस के आधा दर्जन मोबाइल डीलरों के यहां महंगे मोबाइल हैंडसैट की मांग बढ़ गई.

रिजर्व बैंक ने 30 सितंबर तक 2000 के नोट बैंक में जमा करने का समय दिया है. जिस दिन ये घोषणा हुई उसी दिन से इस गुलाबी नोट के नाम पर मोलभाव शुरू हो गया है. हिन्दुस्तान ने आगरा, अलीगढ़, वाराणसी, प्रयागराज जैसे शहरों में पड़ताल की तो पाया कि यह नोट अब किसी के लिए सांसत तो किसी के लिए सौदेबाजी का नया हथियार बन गया है. एक नजर देखें, कहां कैसे हो रहा इस बड़े नोट में लेनदेन.

अलीगढ़ शादी की तारीख तय नहीं, बुकिंग करा रहे

दो हजार के नोट को लोग तरह-तरह से खपाने में लगे हैं. ऐसे परिवार भी बाजार में बिना शुभ मुहूर्त देखे ही बुकिंग कराने जा रहे हैं जिनके यहां बच्चों की शादियां अगले साल होने वाली है. दो-दो हजार के नोट से कैटरर्स, लॉज, बैंड-बाजा की बुकिंग कराई जा रही है. जिन महिलाओं के पास दो-दो हजार के नोट हैं, वह भी शादी समारोह के लिए अभी से ब्यूटीपार्लर आदि की बुकिंग कराने को फोन कर रही हैं.

वाराणसी किराना स्टोरबने एक्सचेंज सेंटर

शहर में किराना दुकान से लेकर पेट्रोल पंप तक इन दिनों एक्सचेंज सेंटर बन गए हैं. किराना की जिस दुकान पर पहले हर माह 10-15 नोट आते थे. आरबीआई की घोषणा के दो दिन में 10 से 12 नोट आ गए हैं. यही हाल पेट्रोल पंपों का है. रविवार को भी कई ग्राहक 2000 रुपये के नोट बदलने के लिए पहुंचे. पेट्रोल पंपों पर इन नोटों की संख्या सात-आठ गुना तक बढ़ी है.

प्रयागराज नोट जमा करने वालों पर आयकर की नजर

बैंकों में शनिवार से जमा हो रहे 2000 के नोटों पर आयकर विभाग (आईटी) ने निगरानी भी शुरू करने वाला है. केंद्र सरकार के कर सलाहकार डॉ. पवन जायसवाल ने प्रयागराज में बताया कि 2016 में नोटबंदी के बाद भी बैंकों में अधिक राशि जमा करने वालों पर शिकंजा कसा था. एक हजार की अधिक करेंसी जमा करने वालों के खिलाफ सक्रूटनी 2022 तक चली. इस बार दो हजार की करेंसी वापस लेने का उद्देश्य काला धन रोकना है.

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