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खत्म हो जाएंगी डेंटल और नर्सिंग काउंसिल

नेशनल मेडिकल कमीशन की तर्ज पर नेशनल डेंटल कमीशन तथा नेशनल नर्सिंग एवं मिडवाइफरी कमीशन बनाने संबंधी दो विधेयकों को शुक्रवार को हंगामे के बीच लोकसभा में पारित किया गया. कानून बनने के लिए इन्हें अभी राज्यसभा में पारित करना होगा. उसके बाद नेशनल डेंटल और नेशनल नर्सिंग काउंसिल और इससे जुड़े 75 साल पुराने कानूनों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा.

देश में मेडिकल, डेंटल और नर्सिंग चिकित्सा शिक्षा का संचालन तीन अलग-अलग कानूनों के जरिये होता था. केंद्र सरकार ने 2019 में मेडिकल काउंसिल ऐक्ट को खत्म कर उसकी जगह नेशनल मेडिकल कमीशन अधिनियम बनाकर चिकित्सा शिक्षा के विनियमन का जिम्मा नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को सौंपा था. अभी इसी दिशा में दंत और नर्सिंग चिकित्सा का भी संचालन करने के लिए नए विधेयक लाए गए हैं.

दंत चिकित्सा से जुड़े सभी कार्यों का संचालन करेगा कमीशन नेशनल डेंटल कमीशन विधेयक 2023 के प्रावधानों के अनुसार भविष्य में देश में दंत चिकित्सा से जुड़े सभी कार्य नेशनल डेंटल कमीशन द्वारा संचालित किए जाएंगे. कमीशन में एक चेयरमैन, आठ एक्स आफिसियो सदस्य तथा 24 अंशकालिक सदस्य होंगे. यह दंत शिक्षा को मान्यता, दंत शिक्षा में नेशनल एग्जिट टेस्ट के आयोजन, कॉलेजों को मान्यता तथा आचार संहिता आदि से जुड़े सभी कार्यों का संचालन करेगा. राज्यों के साथ समन्वय के लिए एक डेंटल एडवाइजरी काउंसिल भी गठित की जाएगी. इसके साथ ही 1948 में बने डेंटल काउंसिल ऐक्ट को खत्म कर दिया जाएगा.

नेशनल मेडिकल कमीशन विधेयक पर स्वास्थ्य मंत्रालय की स्थाई समिति ने 2017 में दंत और नर्सिंग शिक्षा के लिए अलग-अलग कमीशन बनाए जाने की सिफारिश की थी. तभी से यह प्रक्रिया चल रही थी.

नर्सिंग काउंसिल ऐक्ट भी खत्म होगा

नर्सिंग शिक्षा के संचालन के लिए नेशनल नर्सिंग एवं मिडवाइफरी विधेयक 2023 को भी लोकसभा में हंगामे के बीच पारित कर लिया गया. इसमें नर्सिंग एवं मिडवाइफरी कमीशन के गठन का प्रावधान है. कमीशन में एक चेयरमैन, 16 एक्स आफिसियो सदस्य तथा 12 अन्य सदस्य होंगे, जो नर्सिंग एवं मिडवाइफरी शिक्षा से जुड़े सभी फैसले लेंगे. इसके सात ही 1947 के नर्सिंग काउंसिल ऐक्ट को भी खत्म कर दिया जाएगा.

 

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