
भारतीय रेल नए साल में धुआं और प्रदूषण से मुक्त हो जाएगी. रेलवे के ब्रॉडगेज रेल लाइनों पर 98 फीसदी विद्युतीकरण का कार्य पूरा हो चुका है. जबकि शेष कार्य दिसंबर 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य है.
इस प्रकार नए साल में देशभर में ब्रॉडगेज रेल लाइनों पर डीजल इंजनों के बजाए विद्युत इंजनों से यात्री ट्रेनों का परिचालन किया जाएगा. इससे रेल यात्रियों को डीजल इंजन के धुए ंव प्रदूषण से छुटकारा मिलेगा. वहीं, डीजल इंजन के अपेक्षाकृत विद्युत इंजनों की क्षमता अधिक होने से ट्रेनों की औसत रफ्तार में 10-15 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी.
रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अक्तूबर तक भारतीय रेलवे के कुल ब्रॉड गेज नेटवर्क के 65,141 आरकेएम (रूट किलोमीटर) पर 98 प्रतिशत विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण हो गया है. उन्होंने ने बताया कि भारतीय रेल में 100 फीसदी विद्युतीकरण का काम मिशन मोड में किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि 2019-20 में रेलवे में डीजल इंजन से ट्रेन परिचालन पूरी तरह समाप्त करने का फैसला किया है. इसका कारण यह था कि डीजल इंजन से प्रदूषण होने के साथ ईंधन खपत (डीजल) पर भारी खर्च होता है. जबकि विद्युत इंजन से ट्रेन परिचालन का खर्च कम होने के साथ क्षमता बढ़ती है.
भविष्य में वंदे भारत ट्रेनें चलाने की योजना
अधिकारी ने बताया कि भविष्य में राजधानी एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस, दुरंतों आदि के स्थान पर सेमी हाई स्पीड वंदे भारत ट्रेनें चलाने की योजना है. सेल्फ प्रोपेल्ड तकनीक से चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस चलने और रुकने में कम समय लेती है. विद्युतीकरण रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों की औसत रफ्तार 10 से 15 फीसदी बढ़ जाती है. उन्होंने बताया कि विद्युतीकरण से हर साल ईंधन बिल पर 150 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी.
ब्रॉडगेज रेल लाइनों पर 98 फीसदी विद्युतीकरण कार्य पूरा, ट्रेनों की औसत रफ्तार में 10-15 फीसदी की बढ़ोतरी होगी


