दुनियाराष्ट्र

बंगाल का शांतिनिकेतन विश्व धरोहरसूची में शामिल

पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है. शांतिनिकेतन में ही कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने एक सदी पहले विश्वभारती की स्थापना की थी.

यूनेस्को ने एक्स पर पोस्ट किया, विश्व धरोहर सूची में शांतिनिकेतन के शामिल होने पर भारत को बधाई. पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित इस सांस्कृतिक स्थल को यूनेस्को की धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए भारत लंबे समय से प्रयास कर रहा था. कुछ महीने पहले, अंतरराष्ट्रीय परामर्श संस्था ‘इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स’ (इकोमोस) द्वारा इस ऐतिहासिक स्थल को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने की सिफारिश की गई थी. प्रसिद्ध वास्तुकार आभा नारायण लांबा ने कहा, यह खबर सुनने के बाद मैं खुशी से नाचने लगी. हमने 2009 में शांतिनिकेतन को विश्व धरोहर की सूची में लाने के लिए काम शुरू किया. आज इसे यूनेस्को की सूची में देखकर हम अच्छा महसूस कर रहे हैं.

कब हुई थी स्थापना

शांतिनिकेतन की स्थापना एक आश्रम के तौर पर रवींद्रनाथ टैगोर के पिता महर्षि देवेंद्रनाथ टैगोर ने 1863 में 07 एकड़ जमीन पर की थी. यहां बाद में रवींद्रनाथ टैगोर ने इस विश्वविद्यालय को स्थापित किया और इसे विज्ञान के साथ कला व संस्कृति की पढ़ाई का उत्कृष्ट केंद्र बनाया. 1901 में केवल पांच छात्रों के साथ रवींद्रनाथ टैगोर ने इसकी शुरुआत की थी. 1921 में इसे राष्ट्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला और आज यहां छह हजार से भी ज्यादा विद्यार्थी अध्ययन करते हैं.

गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के दृष्टिकोण और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक शांतिनिकेतन को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है. यह बहुत ही खुशी की बात है. यह सभी भारतीयों के लिए गर्व का क्षण है. -नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

यूनेस्को ने सूची में किया शामिल, शांतिनिकेतन में ही कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने एक सदी पहले विश्वभारती की स्थापना की थी

 

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