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‘मेरे लिए लोहड़ी सिर्फ त्योहार नहीं है’, माही गिल ने साझा की बचपन की यादें

आपके बचपन की लोहड़ी से जुड़ी कौन सी यादें आज भी दिल के सबसे करीब हैं?

अभिनेत्री माही गिल ने अपने जीवन में लोहड़ी के त्योहार के महत्व को समझाया। साथ ही उन्होंने बताया कि बचपन में वो किस तरह से लोहड़ी मनाती थीं। जानिए अब कैसे इस त्योहार को मनाती हैं माही और करियर से क्यों लिया था उन्होंने ब्रेक? पंजाबी संस्कृति का रंग, आग की गर्माहट और परिवार के साथ जश्न का नाम है लोहड़ी। यह त्योहार सिर्फ मौसम के बदलाव का नहीं बल्कि रिश्तों, परंपराओं और नई शुरुआत का प्रतीक भी है। लोहड़ी के इस खास मौके पर अभिनेत्री माही गिल ने अमर उजाला से अपने बचपन की यादों से लेकर मां बनने के अनुभव, करियर से लिए गए ब्रेक और दमदार कमबैक तक अपनी जिंदगी के कई खूबसूरत पहलुओं पर खुलकर बात की। लोहड़ी की बात की जाए तो मेरे लिए यह त्योहार सिर्फ एक रस्म नहीं बल्कि मेरी जिंदगी की बहुत प्यारी यादों से जुड़ा हुआ है। जब मैं छोटी थी और चंडीगढ़ में रहती थी तब लोहड़ी का मतलब होता था परिवार का साथ, घर की गर्माहट और ढेर सारी खुशियां। आज वक्त बदल गया है। मेरी फैमिली अमेरिका में रहती है और मैं कभी मुंबई तो कभी गोवा में होती हूं, लेकिन बचपन की वह लोहड़ी आज भी मेरे दिल के बहुत करीब है। लोहड़ी वाले दिन घर में एक अलग ही रौनक होती थी। सब लोग मिलकर आग जलाते थे। रेवड़ियां और गजक बांटी जाती थीं। सबसे पहले पूजा होती थी और फिर पूरा परिवार एक साथ बैठता था। अगर किसी घर में शादी की पहली लोहड़ी होती या बच्चे की पहली लोहड़ी होती तो पूरा परिवार वहीं पहुंच जाता था। नॉर्थ इंडिया में लोहड़ी का बहुत महत्व है और मेरी जिंदगी में भी इसका एक खास स्थान रहा है। मम्मी, पापा, भाई-बहन सभी साथ होते थे। आज भले ही हर साल यह मुमकिन न हो, लेकिन वह पल और वह एहसास आज भी मेरे दिल में वैसे ही बसे हुए हैं। लोहड़ी मेरे लिए परिवार, परंपरा और अपनों के साथ होने की खुशी का त्योहार है।

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