छत्तीसगढ़

बदलाव की कहानी सफलता की कहानी : गर्भावस्था में सरकार का मिला साथ, 20 हजार रुपए की सहायता से मंगली के चेहरे पर लौटी राहत की मुस्कान

गर्भावस्था में काम छूटने की चिंता, फिर मिली योजना की जानकारी

रायपुर. ग्राम पंचायत खड़गवां निवासी मंगली मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करती हैं। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच गर्भावस्था का समय उनके लिए खुशी के साथ-साथ आर्थिक चिंता भी लेकर आया था। उन्हें चिंता थी कि गर्भावस्था के दौरान जब वे मजदूरी नहीं कर पाएंगी, तब परिवार का खर्च कैसे चलेगा। ऐसे कठिन समय में श्रम विभाग की मिनीमाता योजना उनके लिए सहारा बनकर सामने आई। मंगली बताती हैं कि गर्भावस्था के दौरान उनके मन में सबसे बड़ी चिंता यही थी कि काम नहीं कर पाने की स्थिति में घर की जरूरतें कैसे पूरी होंगी। मजदूरी ही परिवार की आय का मुख्य साधन होने के कारण कुछ समय काम से दूर रहना उनके लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण था। इसी दौरान उन्हें श्रम विभाग की मिनीमाता योजना की जानकारी मिली। योजना के तहत मंगली को मजदूरी की क्षतिपूर्ति स्वरूप 20,000 रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। यह आर्थिक मदद उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई। सहायता राशि मिलने से उन्हें परिवार की जरूरतों को पूरा करने में राहत मिली और गर्भावस्था के दौरान आर्थिक परेशानी को लेकर बनी चिंता भी काफी कम हुई। मिनीमाता योजना से मिली सहायता ने मंगली के जीवन में आर्थिक संबल के साथ मानसिक राहत भी पहुंचाई है। अब वे आने वाले बच्चे को लेकर पहले की तुलना में अधिक निश्चित हैं। उनके लिए यह सहायता केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि कठिन समय में सरकार की ओर से मिला भरोसा है।   मंगली ने योजना का लाभ मिलने पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं श्रम विभाग के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सहायता ने उन्हें बहुत राहत दी है। उन्होंने कहा कि इस मदद से मुझे काफी राहत मिली। मैं इस योजना के लिए सरकार तथा श्रम विभाग का बहुत-बहुत धन्यवाद करती हूं।

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