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आखिर ‘कृष्ण जन्माष्टमी’ के दिन क्यों होती है बारिश?..

आखिर 'कृष्ण जन्माष्टमी' के दिन क्यों होती है बारिश?..

न्यूज़ डेस्क : आज 6 सितंबर का दिन है यानी कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी है। और ये दिन इसलिए खास है क्योंकि आज भगवान श्रीकृष्ण का हैप्पी बर्थडे है। मान्यता के अनुसार कान्हा का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्यरात्रि को हुआ था। भारत ही नहीं दुनिया में कृष्ण जन्माष्टमी को उत्सव की तरह मनाया जाता है। आज राजस्थान समेत देशभर में कान्हा का बर्थडे धूमधाम से सेलिब्रेट किया जा रहा है। कान्हा के जन्मदिन के साथ कई लोक मान्यताएं प्रचलित है। उनमें से एक है कृष्ण जन्माष्टमी के दिन बरसात होना।

प्राचीन मान्यता है कि जब कंस की कारागृह में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। तो माता देवकी और पिता वासुदेव ने अपनी आठवीं संतान कान्हा को सुरक्षित जगह पहुंचने का फैसला किया। भादौं महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्यरात्रि जब वासुदेव नन्हे कान्हा को नंद गांव पहुंचाने के लिए यमुना नदी में उतरे तो यमुना ने भगवान श्रीकृष्ण के चरण पखारने की कोशिश की, लेकिन यमुना का जलस्तर इतना नहीं था कि यमुना जल वासुदेव के सिर पर टोकरी में विराजे भगवान कृष्ण के चरणों तक पहुंच सके। इसलिए यमुना नदी की इच्छा को देखते हुए मध्यरात्रि को बादल इतनी जोर से बरसे कि यमुना में बाढ़ आ गई और नदी का जलस्तर इतना हो गया कि पानी बालरूप भगवान कृष्ण के पैरों को छू गया। लेकिन इससे वासुदेव के सामने संकट पैदा हो गया कि भारी बारिश में उफनती यमुना नदी को वासुदेव पार करे तो कैसे करे। लोक मान्यता है कि वासुदेव की इसी चिंता को जानकार यमुना ने वासुदेव को रास्ता दिया और कान्हा मां यशोदा के पास नंद गांव पहुंचे।

देश के कुछ हिस्सों में मान्यता ये भी है कि बालरूप कृष्ण को पहनाए जाने वाले वस्त्र जिन्हें स्थानीय भाषा में पोतड़े कहा जाता है, उन्हें धोने के लिए कृष्ण जन्माष्टमी के दिन या इसके अगले दिन बारिश आती है। बहुत से अवसर ऐसे आएं हैं जब देश के बहुत से हिस्सों में जन्माष्टमी की मध्यरात्रि को बारिश आई है। इसके कारण इस लोक मान्यता को बल मिला है।

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