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पीड़ितों की देखभाल सच्चा न्याय: कोर्ट

नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में सच्चा न्याय केवल अपराधी को पकड़ने या सजा की गंभीरता से नहीं, बल्कि पीड़ित को समर्थन और सुरक्षा प्रदान करने से मिलता है.

न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने पॉक्सो अधिनियम के तहत सहायक व्यक्तियों की नियुक्ति से संबंधित कई निर्देश जारी करते हुए यह टिप्पणी की. सहायक व्यक्ति का अर्थ है जांच और परीक्षण की प्रक्रिया के माध्यम से बच्चे को सहायता प्रदान करने के लिए बाल कल्याण समिति द्वारा नियुक्त व्यक्ति.

पीठ ने कहा कि बच्चों के खिलाफ अपराधों में आघात काफी गहरा होता है. समय के साथ समर्थन और सहायता की कमी के कारण यह और बढ़ जाता है. ऐसे अपराधों में, सच्चा न्याय केवल पीड़ित को समर्थन, देखभाल और सुरक्षा प्रदान करने से ही संभव है, जैसा कि राज्य और उसके सभी प्राधिकारियों द्वारा प्रदान किया जाता है. इस अवधि के दौरान राज्य संस्थानों के माध्यम से प्रदान की गई सहायता और देखभाल महत्वपूर्ण है. पीठ ने यह बात बचपन बचाओ आंदोलन की याचिका पर सुनवाई करते हुए कही, जिसमें उत्तर प्रदेश में पॉक्सो मामले में एक पीड़ित द्वारा फेस की गई कठिनाइयों को उजागर किया गया था.

शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश के महिला एवं बाल कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिया कि वे सहायक व्यक्ति की नियुक्ति तथा प्रशिक्षण के लिए चयन, भर्ती, विशेष नियमों की आवश्यकता, मानकों के निर्धारण इत्यादि के संबंध में अगले छह सप्ताह के भीतर एक बैठक बुलाएं.

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