
प्रवर्तन निदेशालय ने शनिवार को बताया कि ‘नौकरियों के बदले जमीन’ घोटाले से जुड़े धन शोधन के मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद के परिवार के खिलाफ छापों में एक करोड़ रुपये की अघोषित नकदी जब्त की है. एजेंसी का दावा है कि अपराध के माध्यम से प्राप्त 600 करोड़ रुपये की संपत्ति का पता चला है.
केन्द्रीय एजेंसी ने कहा कि लालू प्रसाद के परिवार और उनके सहयोगियों के लिए रियल एस्टेट और अन्य क्षेत्रों में किए गए निवेशों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है. ईडी ने शुक्रवार को लालू प्रसाद के पुत्र व बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के दिल्ली स्थित परिसर सहित परिवार के सदस्यों के विभिन्न परिसरों पर छापा मारा था. ईडी ने शनिवार को बताया कि छापेमारी में 1 करोड़ रुपये नकद, 1900 अमेरिकी डॉलर, करीब 540 ग्राम गोल्ड, सोने के 1.5 किलोग्राम जेवरात (इसकी कीमत करीब 1 करोड़ 25 लाख रुपये) और कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज मिले.
बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने शनिवार को ट्वीट कर कहा है कि भाजपा सरकार द्वारा सूत्रों के हवाले से इधर-उधर की भ्रामक अफवाह फैलाने अथवा खबर प्लांट करवाने की बजाय रेड के बाद हस्ताक्षर किए जाने वाले पंचनामे की सूची ही सार्वजनिक कर देनी चाहिए. वहीं राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने ट्वीट कर कहा कि संघ और भाजपा के विरुद्ध मेरी वैचारिक लड़ाई रही है और रहेगी. इनके समक्ष मैंने कभी भी घुटने नहीं टेके हैं और मेरे परिवार एवं पार्टी का कोई भी व्यक्ति आपकी राजनीति के समक्ष नतमस्तक नहीं होगा.
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के रिश्तेदारों पर ईडी की छापेमारी के सवाल पर शनिवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि पांच साल पहले भी इन लोगों पर छापेमारी हुई थी. हम लोग (राजद-जदयू) एक साथ हो गए हैं तो फिर से छापेमारी हो रही है. वर्ष 2017 में छापेमारी हुई थी तो इसको लेकर कुछ बातें हुईं और वहां (भाजपा) के लोगों ने मेरे साथ बात करनी शुरू कर दी. उन लोगों की बात को मानकर हम लोग उनके साथ चले गए. फिर हम लोग जब इनके (राजद) साथ आए हैं तो फिर से छापेमारी शुरू हो गई है. क्या मामला है, या नहीं है, ये तो वहीं लोग बताएंगे.
करोड़ों की संपत्ति खरीदी
ईडी ने बताया कि जांच में पता चला कि 600 करोड़ में से 350 करोड़ की अचल संपति खरीदी गई और 250 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति बनाई गई. ज्यादातर जमीन पटना के पॉश इलाकों में गलत तरीके से तत्कालीन रेल मंत्री लालू यादव के जरिए भारतीय रेलवे में जॉब देने के नाम पर हड़प ली गई. इनकी आज कीमत 200 करोड़ रुपये है.


