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जलवायु परिवर्तन से भारी नुकसान का अनुमान

नई दिल्ली . कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) ने अपनी प्रमुख पहल ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर रेजिलिएंस पर द्विवार्षिक रिपोर्ट कैप्चरिंग द रेजिलिएंस डिविडेंड जारी की है.

पृथ्वी विज्ञान मंत्री किरेन रिजिजू ने यहां आयोजित एक कार्यक्रम में बुधवार को यह रिपोर्ट जारी की. इसके अनुसार बुनियादी ढांचा क्षेत्रों और इमारतों में जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए वैश्विक औसत वार्षिक हानि (एएएल) अब 732 – 845 अरब डॉलर आंकी गई है जिसका अर्थ है कि 2021-2022 की 14 जीडीपी वृद्धि जोखिम में है.

रिपोर्ट नए अत्याधुनिक ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क मॉडल और रेजिलिएंस इंडेक्स (जीआईआरआई) के आधार पर रेजिलिएंस में निवेश के लिए एक आकर्षक आर्थिक, वित्तीय और राजनीतिक अनिवार्यता प्रस्तुत करती है. अधिकांश प्रमुख भूवैज्ञानिक और जलवायु-संबंधी खतरों के संबंध में बुनियादी ढांचे की संपत्तियों के जोखिम का अनुमान लगाने के लिए जीआईआरआई पहला सार्वजनिक रूप से उपलब्ध और पूरी तरह से संभाव्य जोखिम मॉडल है. रिपोर्ट में नौ बुनियादी क्षेत्रों में जोखिम को छह प्रकारों में रखा गया है.

इसके अनुसार औसत वार्षिक हानि का 30 भूकंप और सुनामी जैसे खतरों से जुड़ा है जबकि 70 चक्रवात, बाढ़, तूफान आदि खतरों से जुड़ा है.

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