
वाशिंगटन . वैज्ञानिकों ने पहली बार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रयोग करके पृथ्वी के तापमान के बारे में जानकारी जुटाई है. इस तकनीक की मदद से वैज्ञानिकों ने अध्ययन करके बताया है कि अगले दशक में पृथ्वी 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक गर्म हो जाएगी.
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एआई तकनीक से अध्ययन किया है. इनके मुताबिक, 2030 के बाद औद्योगिक स्तर पर तापमान का स्तर 1.5 डिग्री सेल्सियस पार हो जाएगा. अध्ययन से यह भी पता चलता है कि पृथ्वी 2 डिग्री सेल्सियस वार्मिंग को पार करने के लिए ट्रैक पर है. इस बारे में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के जलवायु वैज्ञानिक नूह डिफेंबॉघ ने कहा, नई पद्धति की मदद से पता चलता है कि हम निश्चित रूप से जलवायु में निरंतर परिवर्तन का सामना करेंगे.
70 फीसदी संभावना सही मिली वैज्ञानिकों ने सिस्टम को वैश्विक जलवायु मॉडल सिमुलेशन की एक विस्तृत श्रृंखला का विश्लेषण करने के लिए प्रशिक्षित किया. फिर इसे दिए गए तापमान थ्रेसहोल्ड के लिए समयसीमा निर्धारित करने के लिए कहा गया. एआई का उपयोग करने के दौरान 70 संभावना मिली कि 2044 और 2065 के बीच दो डिग्री की सीमा पार हो जाएगी, भले ही उत्सर्जन में तेजी से गिरावट आए.
1980 से 2021 के आंकड़े का इस्तेमाल
वैज्ञानिकों ने एआई की शक्ति जांचने के लिए ऐतिहासिक माप भी दर्ज किए और सिस्टम में पहले से नोट किए गए हीटिंग के मौजूदा स्तरों का मूल्यांकन करने के लिए कहा गया. इसमें 1980 से 2021 तक के डाटा का उपयोग करते हुए एआई ने पूरे परीक्षण को पास किया. इसमें 2022 तक 1.1 डिग्री सेल्सियस वार्मिंग तक पहुंचने और पैटर्न पर ध्यान दिया गया. डिफेनबॉघ ने कहा, एआई आश्वस्त है कि पहले से ही पर्याप्त वार्मिंग हो चुकी है और 2 डिग्री सेल्सिसय को पार कर जाने की संभावना है.
● 2044 से 2065 के बीच दो डिग्री तापमान सीमा पार होने की संभावना
जलवायु परिवर्तन से आपदाओं में तेजी से होगी वृद्धि
वैज्ञानिकों के अनुसार, गर्माहट की एक डिग्री का एक अंश ही गर्मियों की संख्या में वृद्धि कर देगा. इससे आर्कटिक बर्फ दस गुना गति से पिघलने लगेगी. परिवर्तन से आपदाओं में खतरनाक वृद्धि भी होगी. एक गर्म दुनिया सूखा और जलप्रलय लाएगी. चिलचिलाती हीटवेव अधिक गंभीर हो जाएगी.




