दुनियाराष्ट्र

रक्षा निर्यात बढ़ाने के लिए सरकार तकनीक हस्तांतरण पर विचार कर रही

रक्षा निर्यात बढ़ाने के लिए सरकार कुछ नए कदमों पर गंभीरता से विचार कर रही है. इसके तहत रक्षा सामग्री खरीदने वाले देश को तकनीक का हस्तांतरण और संयुक्त उपक्रम की स्थापना करना शामिल है. इन कदमों से भारत लंबे समय के लिए रक्षा खरीददार तैयार कर सकता है.

सरकारी सूत्रों ने कहा कि भारतीय मिसाइलों, टैंक, लड़ाकू विमान, हल्के हेलीकॉप्टर में कई देशों ने दिलचस्पी दिखाई है. लेकिन इनमें से कई देश चाहते हैं कि भारत उनकी सरकारी एजेंसियों को तकनीक का हस्तांतरण भी करे और उनके साथ संयुक्त उपक्रम भी स्थापित करे. मोटे तौर पर यही नीति भारत भी विदेशों से रक्षा खरीद में अपनाता है. रूस से भारत को कई रक्षा तकनीकों का हस्तांतरण हुआ है. ब्रह्मोस और एके 203 राइफलों के निर्माण के लिए संयुक्त उपक्रम भी भारत में स्थापित किए गए हैं.

इस मामले से जुड़े सूत्रों ने कहा कि हालांकि इस मामले में अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है लेकिन मोटे तौर पर सरकार इन कदमों को लेकर सहमत है. सभी तो नहीं, लेकिन कई तकनीकें हस्तांतरित की जा सकती हैं. कुछ मामलों में संयुक्त उपक्रम स्थापित किए जा सकते हैं. भारत दुनिया के शीर्ष पांच रक्षा आयातक देशों में है. लेकिन जब निर्यात की बात आती है तो उसमें वह 25वें नंबर पर है. मौजूदा समय में रक्षा निर्यात 24-25 हजार करोड़ के बीच है. हालांकि पहले की तुलना में इसमें बढ़ोत्तरी हुई लेकिन इसे बड़े पैमाने पर बढ़ाने के लिए भारत प्रयासरत है. इसके तहत विदेशों में भारतीय दूतावासों को भी यह जिम्मा सौंपा गया है कि वह रक्षा निर्यात को लेकर वहां की सरकार और उद्योग जगत से बात करें.

सूत्रों की मानें तो कई छोटे एवं मझोले देश अपनी रक्षा जरूरतों के लिए आने वाले समय में भारत से रक्षा खरीद कर सकते हैं. भारत की सार्वजनिक रक्षा कंपनियां यदि वहां संयुक्त उपक्रम स्थापित करती हैं तो इससे आने वाले समय में देश को फायदा होगा.

मिस्र ने आकाश मिसाइल और अर्जुन टैंक में दिलचस्पी दिखाई

मिस्र के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान भी रक्षा क्षेत्र में औद्यौगिक भागीदारी के मुद्दे पर चर्चा हुई थी. मिस्र चाहता है कि भारत वहां संयुक्त रक्षा उपक्रम स्थापित करे. मिस्र ने लड़ाकू विमान तेजस, आकाश मिसाइल, अर्जुन टैंक समेत अनेक रक्षा प्लेटफार्म में दिलचस्पी दिखाई है. दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर एक कार्य बल भी बना हुआ जो लगातार बातचीत कर रहा है.

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