
गर्मी की वजह से आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ने की आशंका है लेकिन जानकारों की राय में दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले भारत की स्थिति उतनी बुरी नहीं है और महंगाई का प्रभाव कम ही है. केयर रेटिंग की मुख्य अर्थशास्त्रत्त्ी रजनी सिन्हा ने हिंदुस्तान को बताया है कि ग्लोबल इकोनॉमी की तुलना में भारत कम चिंताजनक स्थिति में है.
सिन्हा के मुताबिक बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अपने 2 फीसदी के लक्ष्य के मुकाबले 7-8 फीसदी महंगाई झेल रही हैं. भारत में ये लक्ष्य 2-6 फीसदी के आस पास है. और ये वित्तवर्ष 2023-24 में 5.1 फीसदी के करीब पहुंच जाएगी. वहीं जापान में भी महंगाई 2 फीसदी के लक्ष्य से दो गुनी है. उन्होंने बताया कि अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन जैसे बाजारों में महंगाई को रोकने को बढ़ाई गई ब्याज दरों का असर कम देखने को मिला था. ऐसे में आने वाले दिनों में ब्याज दरें और बढ़ सकती हैं.
सरकार हरकत में महंगाई न बढ़े इसके लिए सरकार खुले बाजार में सरकार गेहूं और चावल सस्ते दामों पर बेच रही है. गेहूं निर्यात पर पिछले साल लगाई गई लगाम को आगे भी जारी रखा जा सकती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद तैयारियों को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की है. बैठक में मानसून, रबी फसल पर उसका असर, दवाओं से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य चीजों पर चर्चा हुई है. पीएम ने निर्देश दिए हैं कि सभी हितधारकों को इससे जुड़ी जानकारी दी जाए और मौसम विभाग को रोजाना आधार पर अनुमान जारी करने के भी निर्देश दिए गए हैं ताकि लोगों को सटीक जानकारी मिले. फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को भी विपरीत परिस्थितियों के हिसाब से अनाज के भंडारण की तैयारी को कहा गया है.

