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मेघालय में महिलाओं के बराबर अधिकार चाहते हैं पुरुष

शिलांग. पूरी दुनिया में महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार की मांग उठती रही है. इस मांग को लेकर दुनियाभर में कई महिला संगठन भी काम कर रहे हैं. पर मेघालय के खासी और गारो जनजातियों की स्थिति इसके बिल्कुल उलट है. इन जनजातियों के पुरुष वर्षों से महिलाओं के बराबर अधिकारों की मांग कर रहे हैं.

इन जनजातीय समुदायों में सदियों से मातृवंशीय परंपरा चल रही है. यहां शादी में पुरुष की डोली लड़की के घर जाती है. परिवार की संपत्ति की वारिस भी बेटी होती है. परिवार में सरनेम भी महिला सरनेम के आधार पर तय होता है. पर पिछले कुछ समय से पुरुष की ओर से बराबरी की मांग उठने लगी है.

खासी और गारो जनजाति में पुरुषों की महिलाओं के बराबर अधिकारों की मांग की कई वजह है. सिंगखोंगग रिम्पई थेम्माई (एक नया घर) संस्था पिछले तीस वर्षों से पुरुषों को महिलाओं के बराबर अधिकार दिलाने के लिए मुहिम चला रही है. संस्था से जुड़े एक सदस्य के मुताबिक, इस परंपरा में बदलाव जरूरी है.

कई परिवारों में बेटियां नहीं हैं या फिर बेटी जनजाति समुदाय से अलग किसी लड़के से शादी कर बाहर चली गई हैं. ऐसे में वारिस को लेकर समस्या पैदा हो जाती है. क्योंकि, पैतृक संपत्ति पर बेटियों खासकर सबसे छोटी बेटी का हक होता है. माता-पिता का ख्याल रखने के लिए छोटी बेटी मायके में ही अपने पति के साथ रहती है.

इसलिए अभियान का लिया निर्णय मातृवंशीय परंपरा के खिलाफ और पुरुषों को महिलाओं के बराबर अधिकारों के लिए मुहिम चला रही संस्था से जुड़े एम सिएम ने बताया कि हम लोगों को जागरूक कर रहे हैं. वह कहते हैं कि परंपरा तोड़ने के लिए एक लंबे अभियान की जरूरत होती है. इसके लिए समाज का जागरूक होना भी जरूरी है. मेघालय की अर्थव्यवस्था के ज्यादातर हिस्से का नियंत्रण बाहरी लोगों के हाथों में है.

खासी समुदाय में घर की महिलाएं करती हैं फैसले

खासी समुदाय में फैसले घर की महिलाएं करती हैं. घर, परिवार और समाज को संभालने की जिम्मेदारी भी महिलाओं पर होती है. पर खासी हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (केएचएडीसी) के एक आदेश ने पुरुषों की महिलाओं के बराबर अधिकार की मांग को नए सिरे से तेज कर दिया है. केएचएडीसी ने खासी क्षेत्र के सभी गांव और शहरी इलाकों के मुखियाओं को निर्देश दिया है कि वह उन लोगों को एसटी प्रमाणपत्र जारी न करे, जो अपनी मां के कुल का नाम लेकर परंपरा से जुड़े रहने के बजाय पिता का सरनेम अपनाते हैं.

 

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