सांसद सदन में जिम्मेदारी से बोलें जगदीप धनखड़

नई दिल्ली . उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने विधायी बहस की खराब गुणवत्ता को लेकर शुक्रवार को नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि सांसदों को सदन में जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए. उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ करने की जरूरत है, क्योंकि संसद को अखाड़ा नहीं बनने दिया जा सकता.
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के 61वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान ने सांसदों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी है, लेकिन यह एक जिम्मेदारी के साथ आती है. उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर. सांसदों को विशेषाधिकार प्राप्त है, क्योंकि संसद में कही गई किसी भी बात के लिए उनके खिलाफ अदालत में कोई मामला दायर नहीं किया जा सकता.
हमारे संविधान निर्माताओं ने सांसदों को इतना बड़ा अधिकार अनुच्छेद- 105 के माध्यम से दिया है, ताकि सांसद सदन में बेबाक होकर अपनी बात कह सकें. सदन के बाहर अगर वही बात कही जाएगी तो प्रभावित व्यक्ति मानहानि का मुकदमा कर सकता है, फौजदारी मुकदमा भी कर सकता है. धनखड़ ने सांसदों से आत्ममंथन करने का आग्रह करते हुए कहा कि संसद चर्चा के लिए होती है, इसके बजाय इसे लगातार बाधित किया जा रहा है.
