
नदाव लैपिड की बयान पर बात करते हुए चिन्मय मांडलेकर ने कहा, “विभिन्न व्यक्तियों की अलग अलग प्रतिक्रिया हो सकती है. IFFI के जूरी हेड जो हैं, ये उनकी सोच है. दुर्भाग्य की बात ये है कि जिस प्लेटफॉर्म से उन्होंने ये प्रतिक्रिया दी है, उसे हमारे देश में बहुत प्रतिष्ठित समझा जाता है. मैं सिर्फ अपनी बात करूं तो मेरे लिए इस प्रतिक्रिया की अहमियत इससे ज्यादा और कुछ नहीं है.. क्योंकि ना ये फिल्म को छोटा करती है, ना ही ये फिल्म में जो दिखाया गया है उसे छोटा करती है. ये उस व्यक्ति की ज़हनियत दिखाती है, जो ऐसे प्लेटफॉर्म पर आकर एक फिल्म को सिंगल आउट करता है और उसे वल्गर करार देता है.”
भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में जूरी प्रमुख नदव लेपिड (Nadav Lapid) ने अपने बयान में ‘द कश्मीर फाइल्स‘ (The Kashmir files) को प्रोपेगेंडा और वल्गर बताया था. इस बयान के बाद भारतीय फिल्ममेकर्स और एक्टर्स ने भी अपनी अपनी राय रखी है. अनुपम खेर, अशोक पंडित, सुदिप्तो सेन और विवेक अग्निहोत्री जैसी हस्तियां इस मामले पर सामने आई. सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर बहस छिड़ गई है. अब बात इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि इजराइल के राजदूत ने माफी मांगी और उनके बयान की निंदा की. इतना ही नहीं दिल्ली के रहने वाले विनीत जिंदल नाम के वकील ने इजराइली फिल्ममेकर के खिलाफ शिकायत कंप्लेंट भी कराई है.
इस शिकायत की एक कॉपी जिंदल नाम के वकील ने अपने ट्विटर हैंडल पर भी शेयर की है. अपनी इस पोस्ट में उन्होंने‘द कश्मीर फाइल्स के मेकर्स और कास्ट अनुपम खेर को भी टैग किया है. इस बयान ने नाराज हुए वकील ने गोवा पुलिस में फिल्ममेकर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. गोवा डीजीपी जसपाल सिंह को संबोधित करते हुए वकील ने कहा कि ‘द कश्मीर फाइल्स‘ के जरिए उन्होंने हिंदू समाज के लोगों की भावनाओं को आहत किया है. इससे उनकी गलत सोच और गलत इरादे साफ नजर आते हैं.
अभिनेता ने आगे कहा, “मेरे ख्याल से ये हमारे देश की गरिमा है कि आज भी हमारे देश में ऐसे प्लेटफॉर्म हैं जहां पर खड़े होकर आप अपने मन की बात कह सकते हैं. ये हमारे देश को ऊंचा करता है. मैं सच में जानना चाहूंगा कि कितने ही देश हैं, जहां ये श्रीमान जाकर उसी देश की फिल्म को इस तरह से बुरा भला कह सकते हैं. दूसरी बात ये है कि मैं जानना चाहूंगा कि ये जो नदाव लैपिड हैं, इन्हें कश्मीरी पंडितों और जनसंहार के बारे में क्या पता है? इनको हमारे देश के इतिहास के बारे में क्या पता है? कभी मौका मिले तो मैं उनसे जरूर पूछूंगा कि, भई क्या वल्गर लगा आपको उस फिल्म में? हमें भी तो पता चले कि हमने क्या वल्गर बना दिया.”
प्रोपेगेंडा शब्द अपने आप में एक प्रोपेगेंडा बन चुका है
‘द कश्मीर फाइल्स’ को लेकर चिन्मय मांडलेकर ने आगे कहा, “लेकिन किसी सवाल- जवाब की जरूरत नहीं है क्योंकि इस फिल्म को रिलीज होने के बाद से ही जिस तरह का रिस्पॉस लोगों ने दिया है, वो एक तरह से हमारा जवाब है.”
“वैसे ये पहले नहीं हैं, इनसे पहले भी बहुत आ चुके हैं, जिन्होंने के बारे में बहुत अनाप शनाप कहा है. प्रोपेगेंडा शब्द अपने आप में एक प्रोपेगेंडा हो गया है. जब ये फिल्म रिलीज हुई थी, उस वक्त भी काफी लोगों ने इस शब्द का इस्तेमाल किया. मैं यही सबको कहता गया कि आप फिल्म का कोई भी एक तथ्य निकालें और मुझे साबित करके दें कि ऐसा नहीं हुआ था और ये झूठ है. झूठ को जब प्रोजेक्ट किया जाता है, हम उसे प्रोपेगेंडा कहते हैं. लेकिन यहां सब सच्चाई है.”
प्रोपेगेंड शब्द को लेकर अभिनेता ने कहा, “इस फिल्म में जो भी दिखाया गया है, जो भी फैक्ट्स शामिल किये गए हैं, अधिकतर चीजों के वीडियो और खबरें उपलब्ध हैं. लोग उसे देख सकते हैं. अब इसके बावजूद आप इसे प्रोपेगेंडा कहना चाहें तो ये तो वही बात हो गई कि.. दिन है लेकिन कोई कहता रहे कि रात ही है.. इसमें अब हम कर सकते हैं.”
अभिनेता ने कहा, “विवेक अग्निहोत्री एक फाइटर हैं और वो इस वक्त से भी लड़ेंगे. उन्हें इस फिल्म पर हमेशा से विश्वास है, इसीलिए उन्होंने लड़कर इसे तैयार किया है. जिस तरह से इन्होंने ये फिल्म बनाई है, जिस तरह से लोगों तक पहुंचाई है, वो तारीफ के लायक हैं. कमर्शियल सक्सेस तो बाद में आया. जो आंकड़े आए, उसके लिए ये फिल्म कभी नहीं बनी थी. उसकी कभी अपेक्षा ही नहीं थी. विवेक एक lone soldier की तरह इस फिल्म को लेकर चले हैं और वो आज भी वही कर रहे हैं.”

