
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के बीच संसद में वार-पलटवार का दौर देखने को मिला. निर्मला सीतारमण ने मोइत्रा पर पलटवार करते हुए कहा कि ‘पप्पू’ को खोजने के लिए उन्हें अपने घर का बैकयार्ड देखना चाहिए. लोकसभा में महुआ मोइत्रा ने आर्थिक संकेतकों और अर्थव्यवस्था को संभालने के सरकार के तौर-तरीकों को लेकर मंगलवार को निशाना साधते हुए सवाल किया था कि अब ‘असली पप्पू’ कौन है. इसी पर अब निर्मला का जवाब आया है. उन्होंने कहा कि बंगाल में केंद्र सरकार की स्कीमों का बॉयकॉट किया गया.
इस पूरे घटनाक्रम में निर्मला सीतारमण का महुआ मोइत्रा पर किया गया पलटवार देखने और सुनने लायक था. वित्त मंत्री ने उन्हें सलाह दी कि पप्पू को संसद में या कहीं और न ढूंढिए, वो आपको अपने ही घर (पश्चिम बंगाल) में मिल जाएगा.
निर्मला सीतारमण ने कहा, महुआ मोइत्रा ने सवाल उठाया कि पप्पू कौन है, पप्पू कहां है. उनको अपने घर का बैकयार्ड देखना चाहिए और उनको पप्पू पश्चिम बंगाल में मिल जाएगा. वित्त मंत्री ने कहा, मैक्रो-इकोनॉमिक्स की बुनियादी बातों पर सवाल उठाए गए. इसमें कोई शक नहीं कि ऐसी शानदार योजनाओं से आम आदमी को फायदा पहुंचा है. लेकिन बंगाल ने उनको लागू नहीं किया. आपको कहीं और पप्पू को खोजने की जरूरत नहीं है.
सीतारमण ने कहा, लेकिन इससे ज्यादा तो बुरा ये है कि माचिस किसके हाथ में है. मैं इस पर ज्यादा बात नहीं करना चाहती क्योंकि वह अपने सवालों को और तीखा करना चाहती हैं. लोकतंत्र में जनता नेताओं को चुनती है. लोगों को यह कहकर कमजोर मत कीजिए कि उन्हें सत्ता किसने दी है.
13 दिसंबर यानी मंगलवार अतिरिक्त अनुदान मांग पर बहस हुई. महुआ मोइत्रा की बारी आई तो उन्होंने शुरुआत में ही कहा… पंगा मत लेना. करीब 8 मिनट की स्पीच में उन्होंने इकोनॉमिक आंकड़े गिनाते हुए कहा कि सरकार हमें 10 महीने झूठ दिखाती है. आंकड़े बताते हैं कि असली पप्पू कौन है? एक आंकड़ा गिनाते हुए खिसियानी बिल्ली मुहावरे का भी इस्तेमाल किया.
इससे पहले महुआ मोइत्रा ने दावा किया था कि विरोधी दलों के नेताओं को परेशान करने के लिए ईडी को इस्तेमाल किया जा रहा है. यह बताना चाहिए कि ईडी के मामलों में दोषसिद्धि का प्रतिशत क्या है? क्या सिर्फ लोगों को परेशान करने के लिए इस एजेंसी का इस्तेमाल हो रहा है? असली पप्पू कौन है?
सीतारमण ने मोइत्रा पर हमला बोलते हुए कहा, बीजेपी को गुजरात में शानदार जीत मिली है और कितनी आसानी से सरकार बन गई. अब इसकी बंगाल के चुनावों से तुलना करिए. सवाल यह है कि वहां माचिस का इस्तेमाल कैसे और कौन करता था? जब माचिस हमारे हाथ में थी तो हमने उज्ज्वला, उजाला, पीएम किसान योजना, स्वच्छ भारत अभियान दिया. आपके हाथों में माचिस ने हमारे (भाजपा) कार्यकर्ताओं के साथ लूटपाट, बलात्कार किया.
