राष्ट्र

विधायकों की अयोग्यता मामले में शीर्ष अदालत का अल्टीमेटम

नई दिल्ली . सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और कई विधायकों की अयोग्यता से संबंधित याचिका पर फैसला करने में देरी को लेकर विधानसभा अध्यक्ष के प्रति नाराजगी जताई. कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वे शीर्ष अदालत के आदेशों की अनदेखी नहीं कर सकते. पीठ ने कहा कि अगर वह विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बताई समयसीमा से संतुष्ट नहीं होती है तो वह निर्देश देगी कि निर्णय दो महीने के भीतर लिया जाए.

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा, किसी को विधानसभा अध्यक्ष को यह सलाह देनी होगी कि वह उच्चतम न्यायालय के आदेशों की अनदेखी नहीं कर सकते. पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस मुद्दे पर निर्णय लेने की समयसीमा के बारे में अवगत कराने को कहा.

सितंबर में समयसीमा पर सवाल पूछा था उच्चतम न्यायालय ने गत 18 सितंबर को महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश दिया था कि शिंदे और अन्य विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं पर फैसले के लिए समयसीमा बताएं.

‘अगले विधानसभा चुनाव से पहले निर्णय लेना होगा’

सीजेआई ने कहा कि अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला अगले विधानसभा चुनाव से पहले लेना होगा, नहीं तो पूरी प्रक्रिया निरर्थक हो जाएगी. पीठ ने कहा कि भारत के संविधान के विपरीत फैसला होने पर इस अदालत की व्यवस्था को माना जाना चाहिए. पीठ ने संकेत दिया कि वह याचिका पर सोमवार या मंगलवार को सुनवाई कर सकती है. पीठ ने कहा कि निर्णय अगले चुनाव से काफी पहले लिया जाना चाहिए. पीठ ने कहा कि जून के बाद से इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई. यह दिखावा नहीं चल सकता. (स्पीकर के सामने) सुनवाई होनी चाहिए. कोर्ट ने सरकार के शीर्ष कानून अधिकारी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से स्पीकर को सलाह देने के लिए कहा. पीठ ने कहा कि स्पीकर को यह आभास देना चाहिए कि वह मामले को गंभीरता से ले रहे हैं.

 

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