चंद्रयान -3 और लूना-25 पर टिकी दुनिया की नजर

भारत के चंद्रयान-3 और रूस के लूना-25 पर दुनिया भर की नजरें गड़ी हुई हैं. दोनों के बीच सबसे पहले चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की होड़ लगी हुई है. एक ओर चंद्रयान-3 चंद्रमा की कक्षाओं को पार कर सतह के एकदम करीब पहुंच चुका है. वहीं, लूना-25 ने चंद्रमा की पहली कक्षा को पार कर लिया है.
रूस के चंद्र मिशन लूना-25 में शनिवार को कक्षा में बदलाव करते एक तकनीकी समस्या आई है. यह जानकारी रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस ने दी है.
रूसी अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक लूना-25 जब अपनी लैंडिंग-पूर्व कक्षा जाने तैयारी कर रहा था. तब कक्षा बदलते समय एक असामान्य स्थिति उत्पन्न हुई. इसने निर्दिष्ट मापदंडों के साथ कक्षा बदलने की अनुमति नहीं दी.
बजट भारत और रूस के चंद्र अभियानों का बजट काफी अलग है. चंद्रयान-3 का बजट 615 करोड़ रुपये है. वहीं, रूस ने अब तक लूना-25 के बजट का अधिकारिक ऐलान नहीं किया है.
लूना-25 को सोयूज 2.1बी रॉकेट के जरिये 11 अगस्त को प्रक्षेपित किया गया. जहां से यह उसी दिन लूनर ट्रांजिट ट्रैजेक्टरी में पहुंच गया, जबकि, चंद्रयान-3 करीब 15 दिन पांच कक्षाओं को पार करते हुए लूनर ट्रांजिट ट्रैजेक्टरी पर पहुंचा.
लूना-23 में केवल लैंडर है मौजूद
लूना-25 में केवल लैंडर मौजूद है. इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसे दो अलग-अलग हिस्सों में बांटा जा सकता है. सबसे ऊपर इंस्ट्रूमेंट कंपार्टमेंट है, जबकि निचले हिस्से में प्रोपल्शन सिस्टम है. लूना-25 में 8 तरह के इंस्ट्रूमेंट भेजे गए हैं. जबकि, चंद्रयान -3 में लैंडर और प्रोपल्शन माड्यूल मौजूद हैं. इसका लैंडर विक्रम चांद की सतह पर उतरेगा. इसके बाद इसके भीतर से रोवर प्रज्ञान निकलेगा, जो चांद की सतह घूमेगा.


