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समुद्र ज्यादा गर्म होने से प्रलयकारी बारिश का खतरा

नई दिल्ली. भारतीय समुद्र के ज्यादा गर्म होने के कारण मानसून से पहले और मानसून के दौरान प्रलयकारी बारिश की घटनाओं में वृद्धि हो रही है. समुद्र में उठने वाली लू की तीव्र लहरें आने वाले समय में इस समस्या को और जटिल बना सकती हैं. नेचर में प्रकाशित एक शोध रिपोर्ट में यह बात कही गई है.

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय समुद्र क्षेत्र अपेक्षाकृत ज्यादा गर्म हो रहा है. 1870 से लेकर अब तक सुमद्र के औसत तानमान में 1.4 डिग्री की वृद्धि हो चुकी है. यह वृद्धि विश्व के अन्य समुद्र की तुलना में सर्वाधिक है. समुद्र के बढ़ते तापमान के कारण वहां उत्पन्न होने वाली मरीन हीटवेब (समुद्री लू) भी तीव्र हो रही हैं.

30 हजार समुद्री हीटवेब रिकॉर्ड की गई रिपोर्ट के अनुसार 2000 से पूर्व कोई भी हीटवेब 50 दिन के भीतर खत्म हो जाती थी, लेकिन अब इनका समय 250 दिनों तक विस्तारित हो चुका है. समुद्र में चलने वाली इस प्रकार की हीटवेब मानसून पर असर डाल रही है.

पूर्व अनुमान चुनौतीपूर्ण

देश में समुद्र का बढ़ता तापमान और लंबी चलने वाली समुद्री लू के कारण तटीय राज्यों में मानसून के दौरान और उसके पहले या बाद में अत्यधिक बारिश की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जो गंभीर रूप धारण कर लेती हैं. ऐसी घटनाओं का पता लगाना चुनौतीपूर्ण है. 63.8 करोड़ लोग मानूसनी जोखिम का सामना कर रहे

● हर 10 में से आठ भारतीय इस जोखिम के साए में जी रहा

● मानसून के लिहाज से 75 जिले हॉटस्पॉट बन चुके हैं

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