मध्य प्रदेश

औरत ही औरत की दुश्मन…’, ट्विशा शर्मा मौत केस में प्रियंका चतुर्वेदी का रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह पर हमला

गिरिबाला के बयान पर प्रियंका ने उठाए सवाल

भोपाल। भोपाल के चर्चित मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (UBT) की महिला सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्विशा शर्मा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के बयान पर हमला बोला है। प्रियंका चतुर्वेदी ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर ‘औरत ही औरत की दुश्मन होती है’ का कोई चेहरा होता, तो वह यही महिला होतीं। प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो शेयर करते हुए लिखा- अगर “औरत ही औरत की दुश्मन होती है” का कोई चेहरा होता। यह महिला एक रिटायर्ड जज है, वह जानती है कि कानूनी प्रक्रिया को कैसे पार करना है, उसके लिए एक ऐसी महिला को बदनाम करना आसान है जो अब अपना बचाव करने के लिए नहीं है। ट्विशा शर्मा की मौत के बाद सास गिरिबाला सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि ट्विशा ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) की प्रक्रिया शुरू करने के बाद उसे रोकने की इच्छा जताई थी। हालांकि ऐसा संभव नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार ने पूरी प्रक्रिया में ट्विशा का साथ दिया। गिरिबाला सिंह ने ट्विशा के पति और मायके पक्ष को लेकर भी कई बातें कहीं, जिस पर अब विवाद खड़ा हो गया है।  प्रियंका चतुर्वेदी ने इसी बयान को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एक ऐसी महिला, जो अब इस दुनिया में नहीं है उसके चरित्र और फैसलों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाना गलत है। उन्होंने कहा कि ट्विशा शर्मा की सास जो कि खुद जज रह चुकीं हैं। उन्हें केस को अपनी तरफ मोड़ने के लिए कानूनी दांव-पेंच अच्छ तरह आता है। बता दें कि ट्विशा शर्मा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने बड़ा दावा किया है। गिरिबाला सिंह ने मीडिया में दावा किया कि मेरा बेटा शुरुआत से ही उसके व्यवहार की वजह से परेशान था। गिरिबाला सिंह ने दावा किया कि ट्विशा गर्भपात कराना चाहती थी। 17 तारीख को जैसे ही उसे अपनी प्रेग्नेंसी की पुष्टि हुई, उसका पूरा व्यवहार बदल गया। वह इस बच्चे को नहीं रखना चाहती. उसी शाम जब मैं ऑफिस से घर लौटी तो मैंने देखा कि उसकी हालत बेहद खराब थी। वह खुद को मार रही थी और लगातार कह रही थी, ‘मैं इस तरह नहीं जी सकती। उसके विचार काफी उदार थे। वह पूरी तरह अपनी मर्जी से चलती थी और बेहद जल्दबाजी व लापरवाही में फैसले लेती थी।

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