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गांव तक नहीं पहुंचती गाड़ी, पेंशन के लिए सास को पीठ पर लादकर बैंक पहुंची बहू, 9 किमी पैदल चले

घर पर ही पेंशन देने की व्यवस्था है : बैंक मैनेजर

सरगुजा। मैनपाट क्षेत्र से सरकारी सिस्टम की अव्यवस्था की पोल खोलने वाला मामला सामने आया है, जहां 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला को पेंशन दिलाने के लिए उसकी बहू को हर महीने पीठ पर लादकर 9 किलोमीटर दूर बैंक ले जाना पड़ रहा है। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब चर्चा का विषय बन गया है। जानकारी के मुताबिक मैनपाट के कुनिया ग्राम पंचायत में रहने वाली सुखमुनिया बाई अपनी 90 वर्षीय सास को कई महीनों से पीठ पर लादकर बैंक ले जा रही है। पेंशन निकालने के लिए उन्हें पहाड़ी रास्तों, कच्चे मार्गों और नालों को पार करना पड़ता है। भीषण गर्मी में यह सफर और भी मुश्किल हो जाता है। सुखमुनिया बाई का कहना है कि पहले पेंशन की राशि बैंक मित्र के माध्यम से घर तक पहुंच जाती थी, लेकिन अब बैंक जाकर स्वयं राशि निकालना अनिवार्य हो गया है। बुजुर्ग महिला चलने-फिरने में असमर्थ है। जंगलपारा के रास्ते में नाला पड़ने के कारण वहां कोई गाड़ी नहीं चलती, इसलिए मजबूरी में सास को पीठ पर लादकर पैदल बैंक ले जाना पड़ा। यहां बैंक ने उसे 3 महीने की रुकी हुई पेंशन के 1500 रुपए दिए, जबकि खाते में चार महीने के कुल 2000 रुपए जमा थे। यह तस्वीर सामने आने के बाद ग्रामीण इलाकों में पेंशन भुगतान व्यवस्था और बुजुर्गों की परेशानियों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि सरकार डिजिटल और ऑनलाइन व्यवस्था की बात तो करती है, लेकिन दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए आज भी मूलभूत सुविधाएं आसान नहीं हो पाई है। सोशल मीडिया पर लोग बहू सुखमुनिया बाई की सेवा भावना और मानवता की जमकर सराहना कर रहे हैं। वहीं प्रशासन से मांग की जा रही है कि बुजुर्गों और असहाय लोगों के लिए गांव स्तर पर पेंशन भुगतान की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े। इस मामले में नर्मदापुर सेंट्रल बैंक के मैनेजर मिर्जा अल्ताफ बेग का कहना है कि मैनपाट इलाके में वृद्धावस्था पेंशन घर तक पहुंचाने की व्यवस्था है। इसके लिए बैंक के 8 बैंक मित्र काम कर रहे हैं। जिन्हें भी पैसा निकालना होता है, उनके परिजन अगर बैंक में सूचना दे दें तो बैंक मित्र को उनके घर भेज दिया जाता है।

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