नीली क्रांति” से समृद्धि की ओर: मछली पालन बना ग्रामीण विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता का आधार
योजना के तहत अनेक महत्वपूर्ण गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है

रायपुर। भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कृषि के साथ-साथ सहायक व्यवसायों को भी लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन्हीं में से एक है मछली पालन, जो आज केवल भोजन का स्रोत नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन चुका है। कम लागत, कम समय में बेहतर उत्पादन और बाजार में लगातार बढ़ती मांग के कारण मछली पालन ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भी किसानों से खेती को केवल धान उत्पादन तक सीमित न रखते हुए दलहन, तिलहन, उद्यानिकी, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे आयवर्धक व्यवसायों को अपनाने का आह्वान किया है। इसी सोच के अनुरूप भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाओं का संचालन कर रही हैं, जिससे किसानों और ग्रामीण युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मछली पालन एक ऐसा व्यवसाय है जिसे सीमित भूमि और अपेक्षाकृत कम पूंजी में शुरू किया जा सकता है। तालाब, जलाशय, नहर और अन्य जल स्रोतों का उपयोग कर किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। बढ़ती आबादी और पौष्टिक भोजन की मांग के कारण मछली की खपत लगातार बढ़ रही है। प्रोटीन, विटामिन और खनिजों से भरपूर मछली स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी मानी जाती है। मत्स्य पालन न केवल किसानों की आय बढ़ाता है, बल्कि मत्स्य बीज उत्पादन, आहार निर्माण, परिवहन, प्रसंस्करण और विपणन जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराता है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से मत्स्य कृषकों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। मत्स्य पालन की आधुनिक तकनीकों के प्रसार के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें तालाब प्रबंधन, मत्स्य बीज उत्पादन, रोग नियंत्रण और विपणन संबंधी जानकारी दी जाती है। तकनीकी उन्नयन हेतु विशेष प्रशिक्षण भी संचालित किए जाते हैं। प्रगतिशील मत्स्य पालकों को राज्य के बाहर सफल मत्स्य पालन मॉडल देखने और नई तकनीकों को समझने के लिए अध्ययन भ्रमण पर भेजा जाता है, जिससे वे अपने क्षेत्र में बेहतर तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं। मत्स्य सहकारी समितियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए अनुदान उपलब्ध कराया जाता है, जिससे उत्पादन और विपणन व्यवस्था को मजबूत किया जा सके। अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को नाव और जाल उपलब्ध कराकर पारंपरिक मछली पकड़ने की गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। आइस बॉक्स, तराजू और अन्य आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता से छोटे मछुआरों को बेहतर बाजार और अधिक लाभ प्राप्त हो रहा है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को स्पॉन संवर्धन और झींगा सह मछली पालन के लिए विशेष सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके। भारत सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, रोजगार सृजन और मछुआरों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से संचालित इस योजना के तहत अनेक महत्वपूर्ण गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

