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बेमेतरा जिले में दलहन के रकबे में चार गुना की वृद्धि

सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है

रायपुर. छत्तीसगढ़ शासन की ‘मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेस’ योजना बेमेतरा जिले में दलहन उत्पादन को नई ऊंचाई दे रही है। कृषि विभाग के मार्गदर्शन और उन्नत खेती तकनीकों के चलते जिले में ग्रीष्मकालीन उड़द-मूंग की खेती का रकबा एक वर्ष में चार गुना से अधिक बढ़ गया है। पिछले वर्ष 285 हेक्टेयर में होने वाली खेती इस वर्ष बढ़कर 1191 हेक्टेयर तक पहुंच गई है। विकासखंड नवागढ़ के ग्राम हरदी के किसान इंद्रकुमार ने ग्रीष्मकालीन उड़द की खेती कर सफलता की नई मिसाल पेश की है। कृषि विभाग के अनुसार उन्हें 7 से 8 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन मिलने की संभावना है। वहीं कोरकापारा के किसान शिवशंकर वर्मा को 5 से 6 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन का अनुमान है। दोनों किसानों ने उन्नत बीजों और वैज्ञानिक खेती पद्धतियों को अपनाकर बेहतर परिणाम हासिल किए हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि उड़द और मूंग जैसी दलहन फसलें किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता में भी सुधार करती हैं। जिले में करीब 1000 हेक्टेयर क्षेत्र में 1280 किसानों द्वारा उड़द फसल के प्रदर्शन लगाए गए हैं, जिससे अन्य किसान भी आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। बेमेतरा में दलहन खेती का बढ़ता दायरा इस बात का संकेत है कि वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

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