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आसमान में आज शाम दिखेगा ‘वार्म मून’ का अद्भुत नज़ारा

वार्म मून के समय दुनिया भर में त्योहारों की धूम होती है. इस दौरान जहां भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में होली का त्योहार मनाया जाता है. वहीं, यूरोप यह ईस्टर से पहले उपवास की अवधि होती हैं. यहूदी इस समय के दौरान पुरीम मनाते हैं, जो प्राचीन फारस में उन्हें मारने की साजिश से बचने का प्रतीक है. वहीं, कंबोडिया, लाओस, थाईलैंड और श्रीलंकां में बौद्ध धर्म के लोग माघ पूजा मनाते हैं. यह महात्मा बुद्ध की अपने शिष्यों के साथ की गई सभा के बारे में बताता है.

मौसम की घटनाओं के आधार पर होता है नामकरण

वर्ष में सभी पूर्णिमाओं का नामकरण मौसम की घटनाओं के आधार पर किया जाता है. जब आसामान में वार्म मून नजर आता है तब उत्तरी गोलार्ध में सर्दियों का मौसम खत्म हो रहा होता हैै. इसके अलावा पेड़ों में ठंड के कारण जमी छाल अलग होने लगती है और जड़ें मिट्टी के माध्यम से अपना रास्ता बनाना शुरू कर देती हैं.

सुपर मून से अलग है घटना

इसे सुपरमून नहीं कहा जा सकता है. दरअसल, सुपरमून तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर अपनी कक्षा में निकटतम बिंदु पर होता है, इसे पेरिगी भी कहा जाता है. वर्ष 2023 में चार सुपरमून दिखाई देंगे, जिनमें पहला 3 जुलाई को, दूसरा 1 अगस्त को, तीसरा 31 अगस्त को और चौथा 29 सितंबर को होगा.

शुगर मून भी है नाम

नासा के मुताबिक इसे शुगर मून के नाम से भी जाना जाता है. इस दौरान गन्ने की फसल पक जाती है. जिसका पारंपरिक त्योहारों में काफी महत्व है. वहीं, फूलों में भी रस नजर आने लगता है. इसके अलावा पेड़ों नमें सर्दियों के दौरान जमी छाल हट जाती है और उस स्थान पर नई छाल निकलने लगती है.

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