सुप्रीम कोर्ट के फैसले की व्याख्या अपने अंदाज में कर रहे दोनों पक्ष

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में करीब सालभर पहले हुई सियासी उठापटक पर गुरुवार को फैसला सुनाया. इसके मुताबिक, एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने रहेंगे. शीर्ष कोर्ट ने कहा, तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का शिंदे गुट की बगावत पर फ्लोर टेस्ट बुलाना और उद्धव ठाकरे को बहुमत सिद्ध करने के लिए निर्देश देना गलत फैसला था. अब यथास्थिति का आदेश नहीं दिया जा सकता और न पुरानी सरकार (उद्धव ठाकरे) को बहाल कर सकता है, क्योंकि उन्होंने फ्लोर टेस्ट का सामना किए बगैर इस्तीफा दे दिया था.
सर्वसम्मति से फैसला मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कहा कि राज्यपाल के पास कोई ठोस आधार नहीं था जिससे वह इस फैसले पर पहुंचते कि मौजूदा सरकार संकट में है. जो प्रस्ताव राज्यपाल को दिया गया, उसमें यह नहीं था कि बागी विधायक एमवीए सरकार (महाराष्ट्र विकास अघाड़ी गठबंधन) छोड़ना चाहते हैं. कुछ विधायकों का असंतोष पत्र फ्लोर टेस्ट के लिए पर्याप्त नहीं था.
पीठ ने यह भी कहा, चूंकि उद्धव ठाकरे ने विश्वास मत का सामना किए बिना ही पद से इस्तीफा दे दिया था, इसलिए राज्यपाल ने सदन में सबसे बड़े दल भाजपा के कहने पर सरकार बनाने के लिए शिंदे को आमंत्रित कर सही किया.
विवेक का इस्तेमाल राज्यपाल को विवेक का प्रयोग करते हुए देखना चाहिए था कि क्या सरकार सदन में विश्वास खो चुकी है. पीठ ने 21 जून, 2022 को लिखे विधायकों के पत्र का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि शिवसेना के कुछ विधायक एमवीए सरकार के कामकाज से खुश नहीं थे.
समर्थन वापसी की बात गलत कोर्ट ने कहा कि पत्र से पता चलता है कि असंतुष्ट शिवसेना विधायक, मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद से समर्थन वापस लेने का इरादा नहीं रखते हैं. ज्यादा से ज्यादा यह कहा जा सकता है कि विधायक सरकार की कुछ नीतियों से खुश नहीं थे. इसलिए राज्यपाल ने इस प्रस्ताव पर विचार करके गलत किया और नतीजा निकाला कि ठाकरे सदन में बहुमत खो चुके हैं. वहीं, बागी सदस्यों की दी गई पुलिस सुरक्षा वापस लेने से भी नहीं यह नहीं कहा जा सकता कि सरकार सदन में बहुमत खो चुकी है.
मैंने नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री पद छोड़ा था. अब मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को भी अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए.-उद्धव ठाकरे, पूर्व मुख्यमंत्री
बागी विधायकों की अयोग्यता का मामला जल्द निपटाएं
कोर्ट ने विधानसभा स्पीकर से 16 बागी विधायकों की अयोग्यता के मुद्दे का मुनासिब समयसीमा के भीतर निपटारा करने को भी कहा. अदालत ने कहा कि स्पीकर के समक्ष चल रही अयोग्यता की कार्यवाही को चुनाव आयोग के समक्ष कार्यवाही के साथ नहीं रोका जा सकता. यदि अयोग्यता का निर्णय आयोग के फैसले के लंबित होने पर किया जाता है और आयोग का निर्णय पूर्वव्यापी होगा तो यह कानून के विपरीत होगा.

