
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा में रविवार को मोपा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन किया. इस इंटरनेशनल एयरपोर्ट की आधारशिला नवंबर 2016 में उनके ही द्वारा रखी गई थी. मालूम हो कि डाबोलिम के बाद यह गोवा का दूसरा हवाई अड्डा है. इंडिगो और गोफर्स्ट जैसी कई एयरलाइंस पहले ही जनवरी से नए हवाई अड्डे से 200 से ज्यादा उड़ानें शुरू करने की योजना की घोषणा कर चुकी हैं. पीएम मोदी के साथ इस दौरान गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मौजूद रहे.
लगभग 2,870 करोड़ रुपये की लागत से विकसित यह हवाईअड्डा टिकाऊ बुनियादी ढांचे को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है. बता दें कि नया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा गोवा के उत्तरी भाग में स्थित है जो गोवा की राजधानी पणजी से लगभग 35 किमी दूर है. मोपा गांव में एक ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा स्थापित करने के लिए गोवा सरकार को प्रमुख स्वीकृति केंद्र द्वारा मार्च 2000 में प्रदान की गई थी.
इस अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के दृष्टिकोण के कारण हवाई अड्डे का बुनियादी ढांचा बेहतर हुआ है, जिससे मध्यम वर्ग के लिए हवाई यात्रा सस्ती हो गई है. “पिछली सरकारों की नजर दशकों तक सार्वजनिक सुविधाएं प्रदान करने के बजाय वोट बैंक पर रहीं.”
पीएम मोदी ने अपनी सरकार की उपलब्धि गिनाते हुए कहा कि आजादी से लेकर 2014 तक देश में छोटे-बड़े एयरपोर्ट सिर्फ 70 के आसपास थे. बीते 8 सालों में देश में 72 नए एयरपोर्ट्स तैयार किए गए हैं.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गोवा से तीन राष्ट्रीय आयुष संस्थानों का ऑनलाइन उद्घाटन किया. ये संस्थान उत्तरी गोवा को धारगल में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में राष्ट्रीय यूनानी औषधि संस्थान और दिल्ली के नरेला में राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान हैं.
यह आयोजन नौवें विश्व आयुर्वेद सम्मेलन और आरोग्य प्रदर्शनी 2022 के अवसर पर किया गया. प्रधानमंत्री ने विश्व आयुर्वेद सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि ये तीनों संस्थान आयुष स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को और गति देंगे. उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल इलाज नहीं है बल्कि यह आरोग्य है, जो हमें जीना सिखाता है. उन्होंने कहा कि आयुर्वेद और योग भविष्य की नई उम्मीद है, जिसे पहले अनदेखा किया गया था. उन्होंने कहा कि आयुष उद्योग सात गुना बढ़ा है और यह लगभग डेढ़ लाख करोड़ रूपये का हो गया है. इससे कृषि क्षेत्र को लाभ होगा और रोज़गार के अवसर उपलब्ध होंगे. प्रधानमंत्री ने आयुर्वेद के प्रोत्साहन देने के लिए डाटा आधारित सबूतों के दस्तावेज़ीकरण पर बल दिया.
