
अफ्रीकी देश गाम्बिया में तथाकथित भारतीय कफ सिरप पीने से 66 बच्चों की मौत मामले में मेडन फार्मा कंपनी को बड़ी राहत मिली है. कंपनी को केन्द्र सरकार ने क्लीन चिट दे दी है. केन्द्र सरकार ने कहा कि जांच में सिरप में किसी किस्म की मिलावट नहीं पाई गई है. सिरप की क्वालिटी भी स्टैंडर्ड है. राज्य सभा में जवाब देते हुए केन्द्र सरकार ने यह बात कही है.
केन्द्र सरकार ने राज्य सभा में जवाब देते हुए कहा कि कफ सिरप की जांच में कोई खामी नहीं पाई गई है. केन्द्र में बताया कि मेडन फार्मा कंपनी की सीरत पर आरोप लगने के बाद जांच के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से डॉ वाईके गुप्ता की अध्यक्षता में एक जांच समिति बनाई गई थी. समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सिरप की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं है.
चार सदस्यीय समिति में चिकित्सा संबंधी स्थायी राष्ट्रीय समिति के उपाध्यक्ष डॉ. वाई के गुप्ता, पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान की डॉ. प्रज्ञा डी यादव, नयी दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के महामारी विज्ञान विभाग की डॉ. आरती बहल और सीडीएससीओ के ए.के. प्रधान शामिल थे. भारत में निर्मित चार कफ सिरप से गांबिया में संभावित रूप से 66 बच्चों की मौत के मामले पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से प्राप्त विवरण और प्रतिकूल घटना रिपोर्ट की जांच के लिए सरकार ने विशेषज्ञों की चार सदस्यीय समिति का गठन किया था.
रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री भगवंत खुबा ने 13 दिसंबर को राज्यसभा में लिखित जवाब में कहा कि जांच के दौरान यह पता चला कि हरियाणा के स्टेट ड्रग कंट्रोलर ने कंपनी को चार दवाओं के निर्माण का लाइसेंस केवल निर्यात के लिए दिया था. इन दवाओं में प्रोमेथेजिन ओरल साल्यूशन बीपी, कोफेक्समालिन बेबी कफ सिरप, मैकोफ बेबी कफ सिरप और माग्रिप एन कोल्ड सिरप शामिल हैं. इन दवाओं को भारत में बिक्री के लिए लाइसेंस नहीं दिया गया है और यहां इनका विपणन या वितरण नहीं किया जाता है. इसके अलावा, उपरोक्त दवाओं के सैंपल लिए गए. जांच दल द्वारा परीक्षण और विश्लेषण के लिए क्षेत्रीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला, (आरडीटीएल) चंडीगढ़ भेजे गए.




